पश्चिम बंगाल के व्यक्ति ने ऑटिज्म ग्रस्त बच्चों को सीखने में मददगार रोबोट बनाया


कोलकाता पश्चिम बंगाल के रहने वाले 62 वर्षीय एक सेवानिवृत्त अस्पताल कर्मी ने अपने खर्च पर ऐसा रोबोट बनाया है जो ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों को सीखने में मदद कर सकता हैं। यह रोबोट डेंगू जैसी बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाने और यहां तक होटल-रेस्तरां में वेटर के रूप में भी काम कर सकता है।
हावड़ा शहर के रहने वाले अतनु घोष ने बताया कि उन्होंने रोबोट को डिजाइन करने की कला अपने पिता नृपेंद्र नाथ घोष से सीखी जो कलकत्ता विश्वविद्यालय के शरीर क्रियाविज्ञान (फिजियोलॉजी)विभाग में बतौर अनुसंधान उपकरण डिजाइनर के तौर पर काम करते थे।
घोष ने 1979 में 18 साल की उम्र में अपना पहला रिमोट-नियंत्रित रोबोट डिजाइन किया था, जिसके लिए उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से प्रशंसा मिली थी।
घोष ने ‘पीटीआई-भाषा’को दिए साक्षात्कार में कहा कि उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अपने अगले रोबोट ‘कृति’ को बनाया था जिसका इस्तेमाल मरीजों को दवा भिजवाने में किया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने 2023 में डॉक्टरों की देखरेख में ऑटिज्म ग्रस्त बच्चों को शब्द, रंग और आकार सीखने में सहायता करने के लिए ‘ब्रावो’ नामक एक और रोबोट बनाया। यह अपने डिस्प्ले के माध्यम से डेंगू जैसी बीमारियों के बारे में जागरुकता भी पैदा कर सकता है और वेटर के रूप में भी काम कर सकता है।’’
घोष ने बताया कि उन्होंने दोनों रोबोट अपने खर्च पर बनाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सरकार या उद्यमियों से वित्तीय सहायता मिलती है, तो वह लोक कल्याण के लिए ऐसे और रोबोट बना सकेंगे।